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ड्यूटी साथ… मौत भी साथः नहर में कार गिरने से 4 बैराज कर्मियों समेत 5 घरों के बुझ गए चिराग

कार नहर में गिरने से चार बैराज कर्मियों समेत पांच लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में चार लोग बैराज पर बेलदार के पद पर तैनात थे। सभी लोग एक साथ ड्यूटी करते थे। लेकिन मंगलवार की वह काली रात जिसमें एक साथ चारों साथियों समेत पांच लोगों की मौत हो गई।

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सांकेतिक तस्वीर फोटो जेनरेट Ai

सांकेतिक तस्वीर फोटो जेनरेट Ai

लखीमपुर खीरी में मंगलवार रात एक दर्दनाक घटना हो गई। शादी समारोह से लौट रहा बैराज कर्मचारियों का दल एक अल्टो कार में सवार था। रात करीब 11 बजे जब वे गिरिजापुरी-लखीमपुर हाईवे से गुजर रहे थे। तभी पढुआ थाना क्षेत्र के पास शारदा नहर के सोती साइफन पर कार अचानक अनियंत्रित हो गई। तेज रफ्तार में कार पुल की रेलिंग तोड़ते हुए सीधे नहर के गहरे पानी में जा गिरा।

हादसा इतना अचानक हुआ कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। आस-पास मौजूद लोग घटना स्थल की ओर दौड़े और सहायता करने की कोशिश करने लगे। लेकिन कार पूरी तरह पानी में डूब चुकी थी। तत्काल पुलिस को सूचना दी गई।

ट्रैक्टर से कार को बाहर निकाला गया

पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से ट्रैक्टर लगाकर कार को नहर से खींचकर बाहर निकाला गया। शीशा तोड़कर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। लेकिन तब तक कार में सवार पांच लोगों की सांसें थम चुकी थीं। एक युवक सूरज उर्फ बब्बू जीवित मिला। जिसे तुरंत सीएचसी रमिया बेहड़ में भर्ती कराया गया।

सभी मृतक बैराज पर तैनात कर्मचारी

मृतकों में चार लोग बैराज पर बेलदार के पद पर काम करते थे। उनकी पहचान लालाजी साहनी (35), सुरेंद्र सोखा (55), अजीमुल्ला उर्फ खुरचाली (55), और घनश्याम (24) के रूप में हुई है। वहीं पांचवां मृतक, जितेंद्र कुमार (24), तेलागौड़ी गांव का रहने वाला था और उसके पिता बाटी-चोखा बेचकर परिवार चलाते हैं।

परिवारों में पसरा मातम, कई घरों का सहारा छिना

साथ काम करने वाले बैराज कर्मचारियों ने बताया कि यह सभी रोज साथ ड्यूटी करते थे। दुर्घटना की खबर मिलते ही सभी कर्मचारी रो पड़े। सुरेंद्र सोखा पीछे पत्नी और चार बच्चों को छोड़ गए। इनमें रेखा (18), रानी (16), पंकज (12) और सिवानी (5)। अब परिवार की पूरी जिम्मेदारी पत्नी के कंधों पर है। लालजी साहनी के परिवार में पत्नी सुमन और तीन बच्चे प्रीति (15), विशाल (12) और राज (10) हैं। उनकी मां ने बताया कि लालजी को उसके पिता की मौत के बाद नौकरी मिली थी। अजीमुल्ला उर्फ खुरचाली की मौत के बाद उनकी पत्नी के सामने दो बेटों की परवरिश की जिम्मेदारी आ गई है। बाकी बच्चे शादीशुदा हैं।
घनश्याम के पिता की भी पहले ड्यूटी के दौरान मौत हुई थी। वह उनकी जगह नौकरी कर रहा था। उसकी मौत से मां, पत्नी, बहन और चार महीने की बेटी हर्षिता का सहारा छिन गया है। जितेंद्र गोरखपुर से आईटीआई कर रहा था। और विदेश नौकरी के लिए तैयारी में था। वह अपने माता-पिता और छोटे भाइयों-बहनों का सहारा था।