Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नौनिहालों को सर्दी के मौसम में निमोनिया के वार से बचाएगा ‘सांस’

मौसम में बदलाव होने से सर्दी का असर तेज होने लगा है। लोग निमोनिया की चपेट में आने लगे है। विशेषकर छोटे बच्चों को निमोनिया का अधिक खतरा रहता है। हर रोज सरकारी गैर सरकारी अस्पतालों में निमोनिया पीडि़त बच्चे पहुंच रहे है।

2 min read
Google source verification

बारां

image

Mukesh Gaur

Nov 18, 2025

जरूरत पडऩे पर उन्हें उपचार के लिए रेफर किया जाएगा। समुचित उपचार सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएगी।

बारां. जिला अस्पताल का एमआईसीयू वार्ड।  पत्रिका

जिले में एक सप्ताह की देरी से आज शुरू होगा राष्ट्रीय अभियान, डोर-टू-डोर सर्वे, होगी कार्यशाला और जागरूकता गतिविधियां

बारां. मौसम में बदलाव होने से सर्दी का असर तेज होने लगा है। लोग निमोनिया की चपेट में आने लगे है। विशेषकर छोटे बच्चों को निमोनिया का अधिक खतरा रहता है। हर रोज सरकारी गैर सरकारी अस्पतालों में निमोनिया पीडि़त बच्चे पहुंच रहे है। शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों में निमोनिया मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। लोगों को निमोनिया के प्रति जागरूक करने के लिए 12 नवंबर को विश्व निमोनिया दिवस भी मनाया जाता है। सरकार की ओर से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से 12 नवंबर से 28 फरवरी तक के लिए ‘सांस’ अभियान शुरू कर दिया था। हालांकि जिले में इसके प्रचार-प्रसार की गति धीमी है। अभियान की शुरूआत भी एक सप्ताह की देरी से बुधवार की की जाएंगी।

निमोनिया नहीं तो बचपन एकदम सही

सीएमएचओ डॉ. संजीव सक्सेना ने बताया कि अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। आशा व एएनएम कार्यकर्ता डोर-टू-डोर सर्वे कर बीमार बच्चों की स्क्रीङ्क्षनग करेंगी। जरूरत पडऩे पर उन्हें उपचार के लिए रेफर किया जाएगा। समुचित उपचार सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएगी। अभियान के तहत ’निमोनिया नहीं तो बचपन सही’ थीम पर विविध गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, चिकित्सा संस्थान तथा आंगनबाड़ी केंद्रों पर आईईसी गतिविधियों के माध्यम से आमजन को निमोनिया के प्रति जागरूक किया जाएगा।

यह है लक्षण

निमोनिया फेफड़ों में जीवाणु संक्रमण से होता है और पांच वर्ष तक के बच्चों में इसका खतरा अधिक रहता है। खांसी व जुकाम का बढऩा, तेज सांस लेना, सांस लेते समय पसलियों का चलना, तेज बुखार आना, झटके आना, खाने-पीने में अरुचि, सुस्ती या अत्यधिक नींद आना। ऐसे में बच्चों की विशेष देखभाल आवश्यक है।

ये हैं बचाव के उपाय

मौसम में बदलाव होने पर घर में धुआं न होने दें और खिड़कियां खुली रखें। जन्म के पहले घंटे में स्तनपान कराएं। छह माह तक केवल मां का दूध ही दें। छह माह बाद ऊपरी आहार शुरू करें। पीने के पानी को ढककर रखें। खाना पकाने व खिलाने से पहले तथा शौच के बाद हाथ साबुन से धोएं। बच्चे को सर्दी से बचाने के लिए शरीर ढंककर रखें और ऊनी कपड़े पहनाएं।

पीसीवी वैक्सीन की तीन होती हैं खुराक

अभियान के तहत आशा सहयोगिनियां एवं एएनएम बच्चों में निमोनिया के लक्षण पहचानकर अभिभावकों को उपचार के लिए प्रेरित करेगी। निमोनिया से बचाव के लिए पीसीवी वैक्सीन की तीन खुराक 6 सप्ताह, 14 सप्ताह और 9 माह की आयु में अवश्य लगवानी चाहिए। यह वैक्सीन सभी सरकारी चिकित्सा संस्थानों में नि:शुल्क उपलब्ध है।

डॉ. जगदीश कुशवाह, आरसीएचओ

जिले में विधानसभा उप चुनाव के तहत आचार संहिता लगी होने से यह अभियान 19 नवंबर से शुरू किया जा रहा है। अभियान के दौरान आमजन को बच्चों में निमोनिया के प्रति जागरूक किया जाएगा।

डॉ. संजीव सक्सेना, सीएमएचओ