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लाडो अभियान: बेटियों के नाम से हो रही घर की पहचान, धूमधाम से होता है बेटियों का गृह प्रवेश

MP News: मध्यप्रदेश के बैतूल जिलें में रहने वाले अनिल नारायण यादव के नाम की चर्चा भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी होती है, वजह है लाडो अभियान। 8 नवंबर 2015 में अनिल यादव ने बेटियों के महत्व को बताने के लिए 'बेटी के नाम घर की पहचान, डिजिटल इंडिया विथ लाडो' अभियान की शुरूआत की थी।

Anil Narayan Yadav betul
(फोटो सोर्स : सोशल मीडिया)

MP News:मध्यप्रदेश के बैतूल जिलें में रहने वाले अनिल नारायण यादव के नाम की चर्चा भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी होती है, वजह है लाडो अभियान। 8 नवंबर 2015 में अनिल यादव ने बेटियों के महत्व को बताने के लिए 'बेटी के नाम घर की पहचान, डिजिटल इंडिया विथ लाडो' अभियान की शुरूआत की थी। इसके तहत पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी योजना 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' एवं 'स्वच्छ भारत' अभियान का संदेश नेम प्लेट के माध्यम से दिया जाता है। साथ ही बेटा बेटी के भेदभाव को खत्म करने के लिए बेटियों का प्रथम गृह प्रवेश भी धूमधाम से कराया जाता है।

ऐसे हुई शुरूआत

अनिल नारायण यादव बताते है कि, आज से कई साल पहले जब मैं अखबार पढ़ता था या सोशल मीडिया देखता था तो उसमें महिलाओं और बेटियों पर अत्याचार की खबरे देखने को मिलती थी। बेटियों को बोझ समझना, दहेज के लिए प्रताड़ित करना, मारपीट और शारिरीक शोषण की खबरों से मन दुखी हो जाता था। इन्हीं कारणों के चलते मन में बेटियों के लिए कुछ करने की इच्छा जागी।

पीएम मोदी के बेटी-बचाओ संदेश का असर

Anil Narayan Yadav betul

अनिल नारायण यादव ने बताया कि, पीएम मोदी ने 22 जनवरी 2015 हरियाणा के पानीपत से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया। पीएम के इस संदेश ने उन्हें बेटियों के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित किया। 8 नवंबर 2015 को आयुषी यादव के जन्म से लाडो अभियान को शुरू किया गया। अभियान को शुरू करना एवं लोगों की मानसिकता बदलना, जागरूकता लाना एक बड़ी चुनौती थी लेकिन लगातार प्रयास ने अभियान को सफल बनाया। प्रदेश सहीत देशभर से लोगों ने इस अभियान की सराहना की। अभियान के तहत लंदन, दुबई, अमेरिका तक नेम्पलेट के माध्यम से घरो की पहचान अब बेटियों के नाम से हो रही है।