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Richa Chadha: ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ की एक्ट्रेस ने सालों बाद तोड़ी चुप्पी, बोली- डायरेक्टर के कहने पर मैंने मजबूरी में गलत…

Richa Chadha: एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा ने कहा- “2011-12 में मैं बहुत परेशान थी, एक डायरेक्टर ने मुझसे कहा कि कोई तुम्हें कास्ट नहीं करेगा, इसलिए ये करना होगा, वो करना होगा… मैंने मजबूरी में 'हां' कह दिया।”

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मुंबई

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Saurabh Mall

Nov 30, 2025

Gangs of Wasseypur actress Richa Chadha

एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा का टूटा ‘सब्र का बांध’ (इमेज सोर्स: एक्ट्रेस इंस्टाग्राम)

Richa Chadha: फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' को रिलीज हुए 13 साल बीत चुके हैं। लेकिन इस फिल्म की लीड एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा ने सालों बाद खुलासा किया है कि 2011-12 में वह कितना परेशान थीं। इतने साल गुजर जाने के बाद अपनी जिंदगी का एक्ट्रेस ने एक दर्दनाक सच सबके सामने रखा है। हाल ही में 15वें इंडिया फिल्म प्रोजेक्ट (IFP) में पहुंचीं ऋचा ने खुलकर बताया कि शुरुआती दिनों में उन्हें किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।

ऋचा चड्ढा का टूटा 'सब्र का बांध'

एक्ट्रेस ने कहा, “2011-12 में मैं बहुत परेशान थी। फिल्म इंडस्ट्री में सफर कभी आसान नहीं होता। कई बार हालात ऐसे बन जाते हैं कि गलत फैसले लेने पड़ते हैं। कभी किसी रोल के लिए पैसे बहुत कम मिलते हैं, कभी पैसा अच्छा मिलता है। अगर किसी पसंदीदा डायरेक्टर के साथ काम करने का मौका मिल भी जाए, तो वहां पैसे कम मिलते हैं। वहीं दूसरे तरह के पास अधिक।

ऋचा ने आगे बताया कि वह एक स्टारकिड नहीं हैं, शायद इसलिए सही मौका मिलना थोड़ा मुश्किल था। उन्होंने 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' के बाद का किस्सा सुनाते हुए कहा, "यह साल 2011-12 की बात है। एक डायरेक्टर ने मुझसे कहा कि तुमने एक बूढ़ी औरत का रोल किया है, कोई तुम्हें कास्ट नहीं करेगा, इसलिए ये करो। जिसमें बिकनी पहननी होगी, ये करना होगा, वो करना होगा। मैंने मजबूरी में 'हां' कह दिया। ये उन डबल-मीनिंग जोक वाली फिल्मों में से थी। मैं यहां फिल्म का नाम नहीं लेना चाहती।"

डायरेक्टर से ले लिए थे एडवांस में पैसे

ऋचा चड्ढा ने आगे बताया कि उन्होंने उसी फिल्म के लिए डायरेक्टर से एडवांस पैसे भी ले लिए थे, लेकिन बाद में किसी ने उन्हें समझाया कि ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ के बाद ऐसा रोल करना उनके करियर के लिए सही नहीं होगा। वैसे भी मुझे भी वो रोल ठीक से समझ नहीं आ रहा था, तो मैंने साफ मना कर दिया और उनके पैसे भी लौटा दिए। उसी दिन मुझे एहसास हुआ कि ‘ना’ कहना कितनी बड़ी ताकत है। अगर वह फिल्म कर ली होती, तो शायद आज मैं यहां नहीं होती।