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धर्मेंद्र ने जब अपने पिता के लिए बोली थी ये बात, ‘काश! मेरे बाऊजी मेरे…’

Dharmendra Old Interview: एक पुराने इंटरव्यू के मुताबिक, धर्मेंद्र ने अपने पैरेंट्स के बारे में बात की थी। उन्होंने बताया था कि कैसे वो अपने काम के चलते माता-पिता के साथ समय नहीं बिता पाते थे और उनको इस बात का अफसोस ताउम्र रहा। उन्होंने अपने पिता को लेकर एक बार कई बातें बताई थीं।

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मुंबई

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Rashi Sharma

Nov 29, 2025

Dharmendra Old Interview

धर्मेंद्र की फोटोज। (फोटो सोर्स: aapkadharam)

Dharmendra Old Interview: हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे स्ट्रॉन्ग और हैंडसम एक्टर्स में से एक धर्मेंद्र बीते 24 नवंबर को दुनिया को अलविदा कह गए। वे पिछले काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। धर्मेंद्र के जाने के बाद से उनकी पर्सनल और प्रोफेशनल जिंदगी से जुड़े कई किस्से-कहानियां बाहर आ रहे हैं। उनके करीबी और चाहने वाले उनके साथ जुड़ी अपनी यादों को शेयर कर रहे हैं। ऐसा ही एक किस्सा जो उनके माता-पिता से जुड़ा है हम आपके साथ शेयर करने जा रहे हैं।

धर्मेंद्र अक्सर अपने इंटरव्यूज में अपने पैरेंट्स के बारे में बात करते थे। इससे पता चलता है कि वो अपने पैरेंट्स से कितना प्यार करते थे। ऐसा ही एक इंटरव्यू (Dharmendra Old Interview) धर्मेंद्र ने एशियन पेंट्स के यूट्यूब चैनल को दिया था जिसमें उन्होंने इस बात का खुलासा किया कि अनजाने में उन्होंने अपने पिता के साथ बहुत गलत किया था। मगर इस बात का एहसास उन्हें तब हुआ जब उनके बेटों सनी और बॉबी ने उनके साथ भी वैसा ही किया।

मेरे बेटे सनी और बॉबी भी मुझसे डरते हैं (Bollywood Father Son Relationship)

बात काफी पहले की है जब बॉलीवुड के ही-मैन अपने गांव (नसराली, पंजाब के लुधियाना जिले का एक गांव) गए थे और अपने स्कूल में उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया था कि वो बचपन में बहुत मस्ती करते थे। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि अपने पिता की तरह ही मैं भी एक स्ट्रिक्ट पिता हूं। मेरे दोनों बेटे सनी और बॉबी भी मुझसे डरते हैं जैसे मैं अपने पिताजी से डरता था। मगर मैं ये चाहता हूं कि मेरे बच्चे मेरे पास बैठें, मुझसे बात करें।

'काश! मेरे बाऊजी मेरे दोस्त बनते'- धर्मेंद्र

मुझे लगता है कि अगर आज मेरे बाऊजी मेरे दोस्त भी होते तो कितना अच्छा होता। हमारी जिंदगी में कई चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें हम बहुत मिस करते हैं। बच्चों के साथ दोस्ती करना बहुत जरूरी होता है। आज जब मेरे बच्चों के पास मेरे पास बैठने का टाइम नहीं है, तो मैं ये मिस करता हूं। सनी और बॉबी मेरे पास बैठते नहीं हैं, वो बहुत बिजी हैं, बस कहते हैं पापा मैं यहां जा रहा हूं, पापा मेरा शूट है और मैं अकेला बैठ रहता हूं। मैं भी ऐसा करता था, मैं बिजी था। मेरे बाऊजी कभी वॉचमैन के पास बैठकर देख रहे हैं। कुर्सी पर बैठकर अपनी छड़ी पर माथा टिकाए कुछ न कुछ सोचते रहते थे। जब मैं पूछता था कि क्या बाऊजी क्या सोच रहे हो आप, कुछ चाहिए आपको। वो कहते थे तुम शूटिंग से जल्दी आ जाया करो, मेरे पास आकर थोड़ी देर बैठ जाया करो। फिर मैं उनको गले लगाकर निकल जाता था।

इसके आगे धर्मेंद्र ने कहा- 'जब शाम को मैं लौटता था तो मेरी मां बिस्तर में थुडी पर हाथ लगाए बैठी रहती थी। उनसे पूछता था तो उनसे भी वो ही जवाब मिलता था। उन्हें हमारा समय चाहिए होता था। माता-पिता चाहते थे कि वो लाढ़ हमने लौटा दो जो हमने तुमको किया है। हमारे अंदर भी एक बच्चा है। एक बच्चा खड़ा है हाथ खोले उसे गले लगा लो। आज जो मुझे महसूस होता है वो हर बाप को महसूस होता है।

जब धर्मेंद्र ने पिता को सुनाये थे पहाड़े

एक न्यूज टॉक शो में धर्मेंद्र ने बताया था कि उनके पिता एक अध्यापक थे और काफी सख्त मिजाज के थे। इसी वजह से धर्मेंद्र को उनसे डर लगता था। एक इंटरव्यू में धर्मेंद्र ने एक किस्सा भी शेयर किया था, 'एक बार मैं मां से जिद करके अपने पिता जी के पास जाकर सो गया, और लेटे-लेटे मेरे पिता जी ने मुझसे कहा कि तुमको नींद नहीं आ रही है तो पहाड़े सुनाओ और मुझे तो पहाड़े याद ही नहीं थे। इसके बाद रात में ही डांट पड़ी और मुझे लगा कि फालतू ही मैं यहां सोने के लिए आ गया।'

धर्मेंद्र हमेशा से ही यही चाहते थे कि उनके बच्चे उनके पास बैठें, और उनसे बात करें उनको अपना दोस्त मानें।