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CAG रिपोर्ट में खुलासा: ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को 32,000,00,00,000 का नुकसान

Greater Noida Authority CAG Report: CAG रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को 32,000,00,00,000 का नुकसान हुआ है। जानिए क्या है वजह?

CAG Report
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को 32,000,00,00,000 का नुकसान। फोटो सोर्स- पत्रिका न्यूज

Greater Noida Authority CAG Report: ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण का गठन करीब 34 साल पहले किया गया था। CAG (Comptroller and Auditor Generals)-2023 की रिपोर्ट से इस बात का खुलासा हुआ है कि अफसरों की लापरवाही और बिल्डरों को अनुचित लाभ देने की वजह से प्राधिकरण को 32 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ। 19 हजार करोड़ का इसमें बकाया है।

बकाया राशि का भुगतान नहीं

CAG की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि कैसे ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने दशकों से औद्योगिक और स्पोर्ट्स सिटी की जमीन आवंटन का कुप्रबंधन किया। इसी वजह से बड़े पैमाने पर बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया। साथ ही जरूरी परियोजनाएं अधूरी रह गईं।

630 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया

ऑडिट में पाया गया कि औद्योगिक भूखंड आवंटियों (Industrial Plot Allottees) का बकाया 630 करोड़ रुपये से ज्यादा है। जबकि स्पोर्ट्स सिटी और रिक्रिएशनल एंटरटेनमेंट पार्क (आरईपी) योजनाओं में 2,330 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं।

19 साल तक की देरी

जनवरी 1991 और मार्च 2021 के बीच, GNIDA (Greater Noida Industrial Development Authority) ने 1,130 हेक्टेयर में फैले 2,580 औद्योगिक भूखंड आवंटित किए। जो उसकी आवंटित भूमि का लगभग पांचवां हिस्सा है। फिर भी अप्रैल 2021 तक, केवल 1,341 भूखंड (52%) कार्यात्मक थे। इनमें से कई में 19 साल तक की देरी हुई। केवल 147 भूखंड (11%) ही मूल विकास समय-सीमा के अनुरूप थे।

972 आवंटियों ने भुगतान में की चूक

इनमें से 972 आवंटियों ने भुगतान में चूक की। जिसकी वजह से 630 करोड़ रुपये का भूमि प्रीमियम, पट्टा किराया और ब्याज बकाया हो गया। इनमें से 374 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया 2005-06 और 2020-21 के बीच किए गए आवंटनों से हुआ। आवंटन रद्द करने या बकाया राशि वसूलने के बजाय, GNIDA ने उन्हें भूखंड अपने पास रखने की अनुमति दे दी।

आवंटन के तौर तरीकों में खामियां

ऑडिट रिपोर्ट में GNIDA के कामकाज में पारदर्शिता की कमी और आवंटन के तौर तरीकों में खामियां पाई गई। तत्कालीन अधिकारी और बोर्ड के प्रबंधन को इसके लिए विफल करार दिया गया है।