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Hardoi Land Case: 14 माह बाद बड़ी राहत-हरदोई पट्टा प्रकरण में निलंबित PCS स्वाति शुक्ला और प्रतीत त्रिपाठी हुए बहाल

UP Govt Reinstates Two PCS Officers: हरदोई के चर्चित भू-आवंटन प्रकरण में निलंबित चल रहे PCS अधिकारी स्वाति शुक्ला और डॉ. प्रतीत त्रिपाठी को 14 माह बाद बड़ी राहत मिली है। शासन ने विभागीय जांच के बाद दोनों अफसरों को बहाल कर दिया है। अब दोनों को शीघ्र ही नई तैनाती दी जाएगी, जिससे प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज है।

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हरदोई

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Ritesh Singh

Nov 07, 2025

हरदोई पट्टा प्रकरण में निलंबित दो PCS अफसर बहाल, 14 माह बाद मिली बड़ी राहत (फोटो सोर्स : Whatsapp Group)

हरदोई पट्टा प्रकरण में निलंबित दो PCS अफसर बहाल, 14 माह बाद मिली बड़ी राहत (फोटो सोर्स : Whatsapp Group)

Hardoi Land Case Bureaucratic Action: उत्तर प्रदेश शासन ने हरदोई के चर्चित भू-आवंटन प्रकरण में निलंबित चल रहे दो PCS अफसरों में स्वाति शुक्ला और डॉ. प्रतीत त्रिपाठी को बड़ी राहत देते हुए पुनः बहाल कर दिया है। कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव आईएएस एम. देवराज की ओर से सोमवार को जारी आदेश में दोनों अधिकारियों को निलंबन से मुक्त करते हुए कहा गया है कि उनकी नई तैनाती का आदेश शीघ्र जारी किया जाएगा। यह बहाली लगभग 14 महीनों बाद हुई है। दोनों अफसरों को सितम्बर 2024 में हरदोई में भूमिहीनों की अनदेखी कर 71 अपात्र व्यक्तियों को लगभग 150 बीघा सरकारी भूमि के पट्टे बांटने के आरोप में निलंबित किया गया था।

क्या था पूरा मामला

सितंबर 2024 में हरदोई सदर तहसील में भूमिहीनों को लाभान्वित करने के लिए सरकारी भूमि के पट्टों की समीक्षा चल रही थी। आरोप है कि इस प्रक्रिया में सही पात्र व्यक्तियों की जगह 71 अपात्र लोगों को लगभग 150 बीघा सरकारी जमीन का पट्टा आवंटित कर दिया गया। जिस समय यह मामला सामने आया स्वाति शुक्ला हरदोई सदर की एसडीएम थी। प्रतीत त्रिपाठी वहीं के तहसीलदार थे। बाद में स्वाति शुक्ला का स्थानांतरण एडीएम (न्यायिक), फर्रुखाबाद के पद पर कर दिया गया, जबकि प्रतीत त्रिपाठी प्रमोट होकर एसडीएम एटा बन गए थे।

DM ने कराई जांच, मिली गड़बड़ियों की पुष्टि

हरदोई के जिलाधिकारी आईएएस मंगला प्रसाद सिंह ने इस पूरे पट्टा आवंटन प्रकरण की जांच मौजूदा एडीएम प्रियंका सिंह को सौंपी थी। जांच में खुलासा हुआ कि पात्र-अपात्र सूची की सही जांच नहीं की गई। कई लोगों को दोबारा भूमि आवंटन हुआ। कई लाभार्थियों का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। प्रक्रिया में मनमर्जी एवं नियमों की अनदेखी हुई। DM ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए दोनों PCS अफसरों पर कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी।

मुख्य सचिव ने भी माना था मामला गंभीर

मुख्य सचिव ने रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद इसे गंभीर प्रकृति का मामला माना और नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग को दोनों अधिकारियों पर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके बाद  एडीएम न्यायिक, फर्रुखाबाद के पद पर तैनात स्वाति शुक्ला,एसडीएम एटा के पद पर तैनात डॉ. प्रतीत त्रिपाठी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। निलंबन अवधि में दोनों अधिकारियों को कार्मिक विभाग से संबद्ध रखा गया।

14 माह बाद बहाली- क्या कहा सरकार ने

लंबी विभागीय जांच के बाद यह पाया गया कि कई प्रक्रियात्मक कमियाँ सामूहिक स्तर पर थी,सभी निर्णय अफसरों के व्यक्तिगत विवेक से नहीं हुए। कुछ तकनीकी खामियों को विभागीय प्रक्रिया का हिस्सा माना गया। इन सभी निष्कर्षों के आधार पर नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग ने दोनों अधिकारियों को निलंबन से मुक्त कर बहाल करने का आदेश जारी किया। आदेश में यह भी कहा गया है कि उनकी तैनाती शीघ्र तय कर नई जगह भेजा जाएगा।

पट्टा प्रकरण: प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना था

हरदोई की यह घटना उस समय पूरे प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई थी। कारण थे,150 बीघा सरकारी भूमि का एक साथ आवंटन ,पात्रता जांच में गंभीर अनियमितताएँ ,SDM और तहसीलदार दोनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई।  यह पहला मौका था जब किसी जिले में इतनी बड़ी मात्रा में पट्टों की गड़बड़ी सामने आई और सीधे दोनों PCS अफसरों पर कार्रवाई हुई।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार इस भूमि के पट्टों को लेकर विधायक और कुछ जनप्रतिनिधियों की सिफारिशें भी आती रहीं। यह भी जांच में सामने आया कि कई लाभार्थी किसी भी सरकारी रजिस्टर में दर्ज नहीं थे, बल्कि बाहरी सिफारिशों पर सूची में जोड़े गए थे। हालांकि अफसरों पर सीधे राजनीतिक दबाव स्वीकार करने का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला, लेकिन पूरी प्रक्रिया में कई स्तरों पर मानक प्रक्रिया (SOP) का पालन नहीं किया गया।

बहाली के बाद प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज

  • दोनों अफसर PCS कैडर में सक्रिय, युवा और कार्यकुशल माने जाते हैं। उनके बहाल होते ही कई चर्चाएं तेज हो गई हैं-
  • क्या प्रशासनिक विवेक के आधार पर उन्हें क्लीनचिट मिली
  • क्या विभागीय प्रक्रिया में समूहगत त्रुटियों को जिम्मेदार माना गया

क्या कुछ आरोप राजनीतिक दबाव का परिणाम थे

हालाँकि शासन के आदेश में साफ़ लिखा है कि विभागीय जांच में निलंबन का आधार बनाए गए आरोप निर्णायक रूप से सिद्ध नहीं पाए गए। कार्मिक विभाग जल्द ही दोनों अधिकारियों की नई तैनाती जारी करेगा। अनुमान है कि स्वाति शुक्ला को किसी राजस्व/प्रशासनिक पद प्रतीत त्रिपाठी को किसी अन्य उपजिलाधिकारी पद पर भेजा जा सकता है। राज्य में बड़ी संख्या में तहसीलदार और SDM के पद खाली हैं, इसलिए उनकी नई पोस्टिंग जल्दी मिल सकती है।