
Indian AI Cancer Breakthrough: जयपुर. भारतीय वैज्ञानिकों ने दुनिया का पहला ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फ्रेमवर्क तैयार किया है जो कैंसर के ट्यूमर के अंदर चल रहे सभी छिपे हुए बायोलॉजिकल प्रोग्राम को एक साथ "पढ़" सकता है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी है। इस फ्रेमवर्क का नाम OncoMark है।
मंत्रालय की ओर से जारी बयान में बताया गया है, "कैंसर सिर्फ बढ़ते ट्यूमर की बीमारी नहीं है। ये कुछ छिपे हुए बायोलॉजिकल प्रोग्राम से चलता है जिन्हें कैंसर के हॉलमार्क कहा जाता है। ये हॉलमार्क बताते हैं कि हेल्दी सेल्स कैसे मैलिग्नेंट (घातक) बन जाते हैं। वो कैसे फैलते हैं, इम्यून सिस्टम को छकाते हुए इलाज से बच जाते हैं। OncoMark इन सभी 10 हॉलमार्क्स को एक साथ मापता है और हर मरीज के ट्यूमर की अनोखी "मॉलिक्यूलर पर्सनैलिटी" बताता है। इससे डॉक्टरों को पता चल जाएगा कि एक ही स्टेज के दो मरीजों में से किसका कैंसर आक्रामक है और किस दवा से सबसे अच्छा असर होगा।
एसएन बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज (कोलकाता) और आशोका यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने मिलकर इसे बनाया है। यह 14 प्रकार के कैंसर के 31 लाख सेल्स के डेटा पर ट्रेन किया गया है। नेचर के जर्नल कम्यूनिकेशन्स बायोलॉजी में 6 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित शोध के अनुसार इसकी सटीकता 96 से 99 प्रतिशत तक है। मंत्रालय का कहना है कि यह तकनीक भारत में तेजी से बढ़ रहे कैंसर के बोझ को कम करने और सस्ता-प्रभावी इलाज उपलब्ध कराने में क्रांतिकारी साबित होगी।
डॉ. शुभाशीष हलदर और डॉ. देबयान गुप्ता की टीम ने OncoMark नाम के फ्रेमवर्क को लीड किया। इसने 14 तरह के कैंसर में 31 मिलियन सिंगल सेल्स को एनालाइज़ किया और सिंथेटिक "स्यूडो-बायोप्सी" बनाईं जो हॉलमार्क-ड्रिवन ट्यूमर स्टेट्स को दिखाती हैं। इस बड़े डेटासेट ने ए आई को यह सीखने में मदद की कि मेटास्टेसिस, इम्यून इवेजन और जीनोमिक इनस्टेबिलिटी जैसे हॉलमार्क्स ट्यूमर ग्रोथ और थेरेपी रेजिस्टेंस को बढ़ावा देने के लिए एक साथ कैसे काम करते हैं। यह उन एग्रेसिव कैंसर की पहचान करने में भी मदद कर सकता है जो स्टैंडर्ड स्टेजिंग में कम नुकसानदायक लग सकते हैं। इससे पहले इलाज में मदद मिलती है।
Updated on:
28 Nov 2025 03:47 pm
Published on:
28 Nov 2025 02:37 pm
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