Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

गड़ीसर प्रोल क्षेत्र में अतिक्रमण की भरमार, फुटपाथ से सडक़ तक अवैध कब्जों ने बिगाड़ी व्यवस्था

जैसलमेर का ऐतिहासिक गड़ीसर प्रोल क्षेत्र पिछले लम्बे अर्से से अतिक्रमण और अव्यवस्थित यातायात व्यवस्था का पर्याय बना हुआ है।

2 min read
Google source verification

जैसलमेर का ऐतिहासिक गड़ीसर प्रोल क्षेत्र पिछले लम्बे अर्से से अतिक्रमण और अव्यवस्थित यातायात व्यवस्था का पर्याय बना हुआ है। शहर के प्रमुख पर्यटन स्थल गड़ीसर जाने और इस इलाके से शहर में प्रवेश के लिए इस मार्ग में फुटपाथ से लेकर मुख्य सडक़ तक अवैध कब्जों का फैलाव बढ़ता ही जा रहा है। स्थिति यह है कि स्थानीय लोगों के साथ पर्यटक भी यहां से गुजरने में असुविधा महसूस कर रहे हैं।

गड़ीसर प्रोल क्षेत्र के कई दुकानदारों ने सामान बाहर तक फैला दिया है। इसके अलावा कई जगह ठेले-खोखे स्थाई रूप से खड़े हो गए हैं, जिससे वाहन चालकों के साथ पैदल चलने वालों के लिए भी स्थितियां विकट हो गई हैं। मुख्य मार्ग पर भी चार पहिया वाहनों का लगातार जमघट रहता है। जबकि उससे थोड़ी दूरी पर सत्यदेव व्यास पार्क के दाहिने हिस्से में वाहनों की पार्किंग के लिए स्थान निर्धारित है। प्रोल के ऐन आगे वाहन चालक गाडिय़ां खड़ी कर देते हैं। इनमें हल्के व भारी चार पहिया खड़े रहते हैं। इससे सडक़ संकरी हो जाती है और सुबह-शाम आवाजाही और अधिक मुश्किल हो जाती है।

समस्या का स्थायी समाधान नहीं

स्थानीय निवासी रमणलाल के अनुसार गड़ीसर गेट क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन व पुलिस ने कई बार कार्रवाई करने की कवायद शुरू भी की, लेकिन जमीनी स्तर हालात फिर-फिर बिगड़ जाते हैं। मार्ग से रोजाना आवाजाही करने वाले जेताराम पंवार के अनुसार सडक़ पर रोज जाम लग जाता है। अतिक्रमण हटे बिना यहां व्यवस्था सुधरना मुश्किल है। कई बार वाहन भिड़ंत और छोटे-मोटे झगड़े की नौबत भी आ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गड़ीसर गेट जैसलमेर की पहचान का मुख्य द्वार है, ऐसे में यहां की अव्यवस्था सीधे शहर की छवि को प्रभावित करती है।

रोक टोक नहीं होने से बिगड़ रहे हालात

गड़ीसर प्रोल क्षेत्र सहित आसनी पथ से गुलासतला और मदरसा मार्ग पर भी अतिक्रमण व सार्वजनिक परिवहन के लिए बनी सडक़ पर अवैध कब्जों का मर्ज लगातार बढ़ रहा है। दुकानदारों के अलावा ठेले वालों के भी बेतरतीब ढंग से खड़ा रहने से दिक्कतें बढ़ गई हैं। डिवाइडर पर छोटी-मोटी वस्तुएं बेचने वालों के बैठने से उनके इर्द-गिर्द भीड़ होती है। इससे भी सडक़ पर आवाजाही का रास्ता संकरा हो जाता है। दूसरी ओर दुकानदारों ने सामान सडक़ों तक फैला रखा है। नगरपरिषद प्रशासन की तरफ से इस इलाके में पिछले काफी समय से विशेष अभियान चलाकर अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई नहीं की गई है। साथ ही, पार्किंग व्यवस्था को दुरुस्त करने व केबिन व्यवस्थित ढंग से लगाने की योजना का धरातल पर उतरना शेष है। फिलहाल तो हालात यह है कि यह पूरा इलाका दिनभर भीड़, जाम और अव्यवस्था से जूझ रहा है।