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President Draupadi Murmu: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सुरक्षा में 1700 से अधिक जवानों को किया गया तैनात, 20 को आएंगीं अंबिकापुर

President Draupadi Murmu: जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर शहर के पीजी कॉलेज मैदान में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुर्मू करेंगी नृत्य प्रतियोगिता विजेताओं का सम्मान

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President Draupadi Murmu

Police jawan's duty in President program (Photo- Patrika)

अंबिकापुर. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) के कार्यक्रम का अब मात्र 2 दिन शेष बचा है। कार्यक्रम की सुरक्षा के लिए 1700 से अधिक सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। राष्ट्रपति 20 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर पीजी कॉलेज ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगी। वे वहां कार्यक्रम को संबोधित करेंगी और जनजातीय नृत्य प्रतियोगिता में विजयी टीम को वे पुरस्कृत करेंगी। कार्यक्रम की सफलता और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) की टीम भी निगरानी रख रही है। सुरक्षा व्यवस्था में हेलीपैड से लेकर कार्यक्रम स्थल तक विशेष ध्यान दिया गया है।

बता दें कि हेलीकॉप्टर के आगमन से लेकर राष्ट्रपति (President Draupadi Murmu) के स्थल तक जाने का पूरा मार्ग सील किया जाएगा और हर दिशा से निगरानी की जाएगी। कार्यक्रम स्थल पर समस्त सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां भी तैनात की गई है।

तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे अपर कलेक्टर सुनील कुमार नायक ने बताया कि गांधी स्टेडियम में हेलीपैड का निर्माण पूरा कर लिया गया है। पीजी कॉलेज ग्राउंड में मुख्य कार्यक्रम (President Draupadi Murmu) होंगे। यहां सरगुजा संभाग के जनजातीय संस्कृति से संबंधित स्टॉल भी लगाए जाएंगे।

साथ ही राज्य सरकार की नई महत्वपूर्ण योजनाएं मुख्यमंत्री अखरा विकास योजना और मुख्यमंत्री गुनिया बैगा सम्मान निधि का शुभारंभ भी राष्ट्रपति के हाथों होना है। इन योजनाओं से जनजातीय समुदाय की संस्कृति, परंपरा और भाइचारे को नई पहचान मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति के साथ प्रदेश के राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित मंत्री, सांसद, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहेंगे।

भारत का इकलौता ग्रामीण राष्ट्रपति भवन

सरगुजा अंचल की जनजातीय धरती एक बार फिर इतिहास के स्वर्ण अध्याय को दोहराने जा रही है। वर्ष 1952 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद (President Draupadi Murmu) पंडो जनजाति की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक दशा का प्रत्यक्ष अवलोकन करने पंडोनगर पहुंचे थे।

उनकी इस यात्रा की स्मृति में यहां आज भी भारत का इकलौता ग्रामीण राष्ट्रपति भवन स्मारक अस्तित्व में है, जो सरगुजा के जनजातीय गौरव का प्रतीक माना जाता है। 73 वर्ष बाद इसी ऐतिहासिक सरगुजा अंचल में एक बार फिर राष्ट्रपति का आगमन होने जा रहा है।

20 नवंबर को भारत की प्रथम जनजातीय महिला राष्ट्रपति महामहिम द्रौपदी मुर्मू जनजातीय गौरव वर्ष के अवसर पर सरगुजा के दौरे पर आ रही हैं। उनके आगमन को लेकर सरगुजा भर में उत्साह और गर्व का उत्सवमय वातावरण है।

राष्ट्रीय संगोष्ठी आज, अजय चतुर्वेदी देंगे प्रस्तुति

जनजातीय गौरव (President Draupadi Murmu) के अंतर्गत 19 नवंबर को राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है, जिसका विषय है स्वतंत्रता संग्राम में जनजातियों की भूमिका। यह संगोष्ठी स्वतंत्रता आंदोलन में जनजातीय नायकों के योगदान पर केंद्रित होगी।

इस राष्ट्रीय आयोजन में राज्यपाल पुरस्कृत एवं पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार अजय कुमार चतुर्वेदी विशेष प्रस्तुति देंगे। वे सरगुजा अंचल के जनजातियों का स्वतंत्रता संघर्ष में योगदान विषय पर अपना शोध-आधारित व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे।

साहित्यकार अजय कुमार चतुर्वेदी ने सरगुजा के 40 विस्मृत स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों (President Draupadi Murmu) की खोज कर उनके विस्तृत जीवन-वृत्त का संकलन करते हुए एक महत्वपूर्ण पुस्तक लिखी है। यह पुस्तक सरगुजा के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने वाला ऐतिहासिक दस्तावेज माना जा रहा है।

President Draupadi Murmu: सरगुजा अंचल के जनजातीय गौरव

सरगुजा अंचल ने जनजातीय समाज के कई प्रेरणादायी व्यक्तित्व (President Draupadi Murmu) देश को दिए हैं। इनमें पद्मश्री माता राजमोहनी देवी, गहिरा गुरु, जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी माझी राम गोंड, महली भगत और राजनाथ भगत जैसे उल्लेखनीय जनजातीय गौरव शामिल हैं।

इन्होंने अपने संघर्ष और नेतृत्व से सरगुजा की पहचान को राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित किया। इसी तरह सरगुजा का गौरव ग्राम पंडोनगर है, जहां राष्ट्रपति भवन स्मारक अवस्थित है, आज भी जनजातीय इतिहास, गौरव और सम्मान का जीवंत केंद्र माना जाता है।

बनेगा नई पहचान की प्रतीक

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) के आगमन एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन से सरगुजा का माहौल उल्लासपूर्ण हो उठा है। स्थानीय जनजातीय समाज इन आयोजनों को अपने इतिहास, सम्मान और पहचान से जुड़े नए अध्याय के रूप में देख रहा है। बुजुर्गों का मानना है कि जिस तरह 1952 ने सरगुजा को राष्ट्रीय मंच दिया था, उसी तरह 2025 का यह अवसर भी नई पहचान और नई ऊर्जा का प्रतीक बनेगा।