
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा। (Photo-IANS)
Bihar politics: आरएलएम के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने बेटे को मंत्री बनाने के सवाल पर कहा कि लोग हमारी पार्टी के सांसद और विधायक बनने के बाद इधर‑उधर चले जाते हैं। इसीलिए उन्होंने अपने बेटे को मंत्री बनाया। उनका कहना था कि बड़ी मेहनत से दल खड़ा किया है; कोई इधर‑उधर चला गया तो पार्टी फिर उसी स्थिति में आ जाएगी। ऐसी स्थिति से बचने का यही एक मात्र उपाय है।
राज्यसभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा को बिहार की एनडीए सरकार में अपने कोटे के मंत्री के रूप में बेटे दीपक प्रकाश का नाम देने पर विरोधी निशाने पर ले रहे हैं। उनके बेटे दीपक कुशवाहा किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। कुशवाहा की पत्नी भी विधायक हैं। इसलिए उन पर परिवारवाद को आगे बढ़ाने का आरोप लग रहा है।
बचाव में कुशवाहा ने कहा कि 2014 में रालोसपा (उनकी पार्टी) के तीन सांसद जीते थे। उनमें से दो ने बाद में पार्टी छोड़ दी, जिससे पार्टी कमजोर हो गई। 2015 के विधानसभा चुनाव में भी हमारे दो विधायक जीते थे। वे भी बाद में चले गए। कुशवाहा ने कहा कि यह केवल हमारी पार्टी की समस्या नहीं है; अन्य छोटी पार्टियों में भी ऐसी ही स्थिति देखी जाती है। इसी कारण से, ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए हमने अपने परिवार से ही मंत्री बनाया।
जदयू से अलग होकर अपनी पार्टी बनाने वाले उपेंद्र कुशवाहा के इस बार चार विधायक हैं। उन्हें चुनाव लड़ने के लिए 6 सीटें मिली थीं। छह में से चार विजेताओं में उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता भी शामिल हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, उपेंद्र ने चारों विधायकों में से किसी को भी मंत्री नहीं बनाकर एक बड़ा दांव खेला है। दीपक किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। मंत्री बने रहने के लिए उन्हें छह महीने के भीतर किसी एक सदन का सदस्य बनना होगा। एनडीए में सीट‑बंटवारे के दौरान भाजपा ने कुशवाहा को एक एमएलसी देने का वादा किया था। इस तरह कुशवाहा ने बेटे को मंत्री बना कर वह वादा पूरा करवाने का रास्ता आसान करने का दांव चला है।
उपेंद्र कुशवाहा ने 2013 में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) बनाई थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में उनके तीन सांसद चुने गए थे। उनमें से एक खुद कुशवाहा थे, बाकी दो अरुण कुमार और राम कुमार शर्मा थे। बाद में दोनों ने पार्टी छोड़ दी।
इसी तरह, 2015 के विधानसभा चुनाव में रालोसपा से चुने गए दो विधायक सुधांशु शेखर और ललन पासवान भी बाद में जेडीयू में शामिल हो गए। 2021 में कुशवाहा ने रालोसपा का जेडीयू में विलय कर दिया, लेकिन दो साल बाद वह फिर से नीतीश कुमार की पार्टी से अलग हो गए और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) नाम से नई पार्टी बनाई।
Updated on:
21 Nov 2025 12:30 pm
Published on:
21 Nov 2025 09:38 am
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