Trump Tariffs on Indian Businesses: अमरीका की ओर से भारत पर 50% तक टैरिफ दर बढ़ाने से यूएस में रह रहे भारतीय कारोबारियों के सालाना 150 अरब डॉलर यानि यानि लगभग 12.6 लाख करोड़ रुपये के कारोबार पर गाज गिरेगी। क्योंकि ये भारतीय बिजनेसमैन कई तरह का कच्चा माल भारत से लेते हैं। भारत से तकरीबन 5-6 अरब डॉलर मूल्य के सोने, चांदी और हीरे का आयात किया जाता है। इनमें जयपुर सबसे बड़ा जवाहरात मार्केट है। जानकारी के अनुसार भारतीय कंपनियों ने अमरीका में अब तक 40 अरब डॉलर (लगभग 3.36 लाख करोड़ रुपये) का निवेश किया है। इन भारतीय कंपनियों ने अमरीका के बाजार को 4.25 लाख से ज्यादा नौकरियां दी हैं। ध्यान रहे कि अमरीका में 51 लाख भारतीय समुदाय के लोग रहते हैं, जिनमें से कई उद्यमी हैं। अमेरिका में भारतीय मूल ( NRI News) के लोग होटल इंडस्ट्री, टेक स्टार्टअप्स, हैल्थकेयर, रिटेल, फार्मास्युटिकल्स, रियल एस्टेट और फूड इंडस्ट्री जैसे फील्ड में बड़ी संख्या में सक्रिय हैं। यह आंकड़ा सीधे तौर पर दर्शाता है कि अगर अमेरिका-भारत व्यापारिक तनाव (US India Trade War) बढ़ता है, तो इसका केवल भारत में नहीं, बल्कि अमेरिका में रह रहे इन व्यापारियों पर भी असर पड़ेगा।
जानकारी के अनुसार भारतीय-अमेरिकी समुदाय अमेरिका को सालाना 250 से 300 अरब डॉलर तक का टैक्स रैवेन्यू देता है। ये आंकड़े अमेरिका की कुल आय कर वसूली में लगभग 5 से 6 प्रतिशत के हिस्से के बराबर हैं। यह इस बात का सुबूत है कि भारतीय व्यापारियों की भूमिका अमेरिका की कर-आधारित अर्थव्यवस्था में कितनी महत्वपूर्ण है। अगर टैरिफ के कारण व्यापार बाधित होता है, तो इसका असर अमेरिका के टैक्स इनकम पर भी पड़ सकता है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में भारतीय मूल के व्यापारियों की ओर से संचालित व्यवसायों का जो कुल सालाना टर्नओवर 150 अरब डॉलर से अधिक है, वह भारतीय कारोबारी अमेरिका में सिर्फ एक प्रवासी समुदाय नहीं हैं, बल्कि वहां की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ भी हैं।
भारत से अमेरिका गए कई उद्यमी आज वहां की आर्थिक नींव का हिस्सा हैं। प्रमुख नामों में सत्य नडेला (Microsoft), सुंदर पिचाई (Google), अर्जय बांगा (MasterCard), जय चौधरी (Zscaler), विनोद खोसला (Khosla Ventures) जैसे वैश्विक कारोबारी शामिल हैं। इसके साथ ही पटेल ब्रदर्स (Patel Brothers), डीप फूड्स (Deep Foods) और अमृत वेंचर्स (Amritt Ventures) जैसी कई भारतीय कंपनियां वहां दशकों से सफलता के साथ कारोबार कर रही हैं।
कन्फैडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के एक अध्ययन के मुताबिक, 163 भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में अब तक 40 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। इन कंपनियों ने मिल कर 4 लाख 25 हजार से ज्यादा नौकरियां भी पैदा की हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि भारतीय कॉरपोरेट दुनिया अमेरिका की नौकरी और उत्पादन प्रणाली में कितनी शिद्दत से जुड़ी हुई है।
अमेरिका की ओर से 50% टैरिफ बढ़ाने से हीरे और आभूषण उद्योग को भी गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है। भारत अमेरिका को हर साल करीब $4 अरब डॉलर के कटे और पॉलिश किए गए हीरे निर्यात करता है। जयपुर हीरे व जवाहरात का अंतरराष्टीय बाज़ार है और टैरिफ बढ़ाने के कारण हीरे की कीमतें बढ़ेंगी और अमेरिकी ज्वेलरी बाज़ार में मंदी आ सकती है। इसके अलावा मसाला और औषधीय उत्पादों के क्षेत्र को सबसे बड़ा झटका लग सकता है। गुजरात के जीरा और ईसबगोल का वैश्विक बाजार में दबदबा है। भारत हर साल करीब 5.38 लाख टन जीरा और 2.36 लाख टन ईसबगोल का उत्पादन करता है। इनमें से 80% से ज्यादा अमेरिका जाता है। इन उत्पादों पर 50% टैरिफ लगने का मतलब है कि अमेरिकी खरीदारों को दोगुनी कीमत चुकानी पड़ सकती है, जिससे निर्यात में गिरावट तय मानी जा रही है।
जानकारी के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स एक और बड़ा सेक्टर है। भारत ने 2024 में अमेरिका को 9.89 अरब डॉलर मूल्य के मोबाइल फोन, कम्प्यूटर डिवाइस और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान भेजे थे। अगर इन पर 50% टैरिफ लगता है, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय । फार्मास्युटिकल सेक्टर की बात करें तो भारत हर साल अमेरिका को 12.73 अरब डॉलर (करीब ₹1.06 लाख करोड़ रुपये) की दवाएं और जेनेरिक दवाइयां भेजता है। इन पर टैरिफ बढ़ने से अमेरिकी उपभोक्ताओं को स्वास्थ्य सेवाओं की कीमतें चुकानी पड़ेंगी। खासतौर से तब, जब अमेरिका अपनी जेनेरिक दवाओं के लिए भारत पर भारी निर्भर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ट्रंप सरकार भारत से आयात पर इस तरह से टैरिफ बढ़ाती है, तो इसका सीधा असर फार्मा, टेक, स्टील, ऑटो, और एग्रीकल्चर जैसे क्षेत्रों में काम कर रही भारतीय कंपनियों पर होगा। भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में अपनी लागत में बढ़ोतरी के चलते लाभ कम होगा, जिससे वे अमेरिकी उपभोक्ताओं को सस्ते दाम पर सेवाएं नहीं दे पाएंगी।
अगर टैरिफ लंबे समय तक लागू रहे, तो भारतीय कंपनियां और व्यापारी दूसरे बाजारों की ओर रुख कर सकते हैं। दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, यूरोप और एशिया के अन्य देश भारत के लिए नए साझेदार बन सकते हैं। इससे अमेरिका को लंबे समय में व्यापारिक नुकसान हो सकता है, और वह अपने सबसे भरोसेमंद साझेदार को खो सकता है।
बाजार के पंडितों का मानना है कि अगर अमेरिका भारत जैसे बड़े और भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार को टैरिफ के ज़रिये अलग करता है, तो उसका खुद का भी भारी नुकसान होगा। एक तरफ़ भारत नई बाजारों की ओर बढ़ेगा, वहीं अमेरिका को उच्च लागत और आपूर्ति श्रृंखला संकट जैसे मुद्दों से जूझना पड़ेगा।
बहरहाल अगर ट्रंप सरकार भारत से आयात पर इस तरह से टैरिफ बढ़ता है, तो इसका फार्मा, टेक, स्टील, ऑटो और एग्रीकल्चर जैसे क्षेत्रों में काम कर रही भारतीय कंपनियों पर सीधा असर होगा। भारतीय कंपनियों को अमरीकी बाजार में अपनी लागत में बढ़ोतरी के चलते लाभ कम होगा, जिससे वे अमरीकी उपभोक्ताओं को सस्ते दाम पर सेवाएं नहीं दे पाएंगी।
Updated on:
07 Aug 2025 09:03 pm
Published on:
07 Aug 2025 06:42 pm