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‘घर क्या मुंह लेकर जाऊं सर…अब कोई रास्ता नहीं बचा है’, दीपावली से पहले शिक्षक ने बयां किया दर्द, इसके बाद उठाया खौफनाक कदम

सिद्धार्थनगर के इटवा ब्लॉक में दीपावली की खुशियों से पहले अंधकार का साया छा गया। एक सरकारी शिक्षक शौकेंद्र गौतम ने दो महीने से रुकी सैलरी और खंड शिक्षा अधिकारी की प्रताड़ना से तंग आकर जहर खा लिया। “दीपावली पर सैलरी दिला दीजिए…” लिखकर उन्होंने जो दर्द बयान किया, उसने पूरे प्रदेश को हिला दिया।

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सिद्धार्थनगर जिले में शिक्षक और शिक्षा विभाग के बीच की टकराहट ने एक बार फिर संवेदनशील सवाल खड़ा कर दिया है - क्या सरकारी तंत्र की कठोर व्यवस्था अब इतनी निर्दयी हो गई है कि दीपावली जैसे त्योहार पर भी एक शिक्षक को “सैलरी दिला दीजिए…” लिखकर जहर खाना पड़े? बुधवार रात यह दर्दनाक घटना सिद्धार्थनगर के इटवा विकासखंड की है। यहां के प्राथमिक विद्यालय भदोखर भदोखरी में तैनात शिक्षक शौकेंद्र गौतम ने खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) की प्रताड़ना से तंग आकर जहर खा लिया। उन्हें तत्काल उनके साथियों ने गोद में उठाकर मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर पहुँचाया, जहाँ उनकी हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।

दो महीने से रुका था वेतन, दीपावली पर टूट गया मनोबल

शौकेंद्र गौतम वर्ष 2016 से इस विद्यालय में कार्यरत हैं। उनके साथियों के अनुसार, पिछले दो महीने से उनका वेतन रोक दिया गया था। दीपावली से ठीक पहले भी जब उन्होंने अपने वेतन के लिए निवेदन किया, तब भी कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कई बार इटवा के खंड शिक्षा अधिकारी राजेश कुमार से वेतन बहाली की गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें टाल दिया गया। शौकेंद्र की वॉट्सऐप चैट अब सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें उन्होंने अधिकारियों से बार-बार निवेदन किया है कि  सर, दीपावली पर घर क्या मुंह लेकर जाएंगे? कृपया मेरी आख्या लगा दीजिए, हमारी भी मजबूरी समझिए सर।”
“मैं मानसिक और आर्थिक रूप से बहुत डिप्रेशन में हूं। अब मेरे पास कोई विकल्प नहीं बचा है।” इन संदेशों से साफ झलकता है कि वे कितनी आर्थिक तंगी और मानसिक दबाव में थे। लेकिन अफसोस, किसी ने उनकी पुकार नहीं सुनी।

प्रताड़ना और जातिसूचक शब्दों के आरोप

शिक्षक ने अपने साथियों को बताया था कि खंड शिक्षा अधिकारी उन्हें बार-बार भनवापुर, डुमरियागंज और इटवा बुलाते थे, जहाँ उनसे “ऑनलाइन रजिस्टर, बच्चों के आधार कार्ड और अन्य प्रशासनिक कार्यों” को लेकर दबाव बनाया जा रहा था। आरोप है कि जब वे इन कार्यों में देरी का कारण बताते, तो अधिकारी उन्हें जातिसूचक शब्दों से अपमानित करते और धमकाते थे। इसी तरह के व्यवहार ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया। उन्होंने एक संदेश में लिखा कि “सर, सबका वेतन बहाल कर चुके हैं, मेरा भी कर दीजिए। मैं भी आपके समाज से हूं… थोड़ा अपने मन और सहानुभूति का परिचय दीजिए।” लेकिन इस करुण संदेश के जवाब में खंड शिक्षा अधिकारी ने लिखा - “पागल हो क्या? कल मुझसे बात करवाना सबको।” यह संवाद आज पूरे जिले में प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवालिया निशान बन गया है।

अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है शिक्षक

घटना के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) शैलेश कुमार स्वयं मेडिकल कॉलेज पहुँचे। उन्होंने बताया कि शिक्षक की हालत बेहद गंभीर है। जब वह बोलने की स्थिति में आएंगे, तो बयान लिया जाएगा। यदि कोई दोषी पाया गया, तो कठोर कार्रवाई होगी,”उन्होंने कहा। शिक्षक के परिवार में पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं, जो बागपत में रहते हैं। वह सिद्धार्थनगर में किराए के कमरे में अपने दो साथियों के साथ रहते थे। साथी शिक्षकों ने उन्हें देर रात बेसुध हालत में पाया और अस्पताल पहुँचाया।

शिक्षक समाज में गुस्सा और आक्रोश

घटना की खबर फैलते ही शिक्षक समाज में आक्रोश की लहर दौड़ गई। प्राथमिक शिक्षक संघ इटवा के ब्लॉक अध्यक्ष कणुलेश मौर्य ने कहा कि खंड शिक्षा अधिकारी की प्रताड़ना के कारण ही शौकेंद्र ने यह कदम उठाया। दो महीने से उनका वेतन रोका गया था, जिसकी शिकायत कई बार की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।”पूर्व विधायक और समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष लाल यादव ने भी सरकार और विभाग पर निशाना साधा यह सरकार की नीतिगत विफलता है। शिक्षकों पर अतिरिक्त कार्यभार और दबाव डालने से मानसिक तनाव बढ़ रहा है। जब प्रशासन संवेदनहीन हो जाए, तो ऐसे हादसे होना स्वाभाविक हैं।”

जांच और कार्रवाई की मांग

शिक्षक संगठनों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि दोषी अधिकारी को तत्काल निलंबित कर निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही घायल शिक्षक को आर्थिक सहायता और गुणवत्तापूर्ण इलाज दिया जाए। माधव प्रसाद मेडिकल कॉलेज की टीम लगातार उनकी देखभाल कर रही है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, उन्होंने अत्यधिक जहरीला पदार्थ खाया था, जिससे उनकी स्थिति अभी भी गंभीर है।

शिक्षा विभाग पर उठे गंभीर सवाल

यह घटना सिर्फ एक शिक्षक की त्रासदी नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग की कार्य संस्कृति पर गहरा प्रश्नचिह्न है। क्यों एक शिक्षक को अपने वेतन के लिए गिड़गिड़ाना पड़ता है? क्यों उसकी “दीपावली पर सैलरी दिला दीजिए…” जैसी विनती किसी को नहीं सुनाई दी?स्थानीय शिक्षकों का कहना है कि अधिकारियों की मनमानी और अहंकार के कारण विभाग में भय और अपमान का माहौल बन गया है। अगर प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो जिलेभर के शिक्षक आंदोलन की राह पर उतर सकते हैं।


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