
कलेक्टर की सूझबूझ से बड़ा फर्जीवाड़ा होने से टला (Photo Source- Patrika)
MP News :मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में कोई और नहीं बल्कि कलेक्टर के साथ फर्जीवाड़ा करने की साजिश रचने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन कलेक्टर को फर्जी निर्देश देने के लिए आरोपी ने खुद को मध्य प्रदेश का मुख्य सचिव बताया था। हालांकि, कलेक्टर गौरव बैनल की सूझबूझ से एक बड़ा फर्जीवाड़ा होने से बच गया और आरोपी भी पकड़े गए। फिलहाल, पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है।
बता दें कि, एक युवक ने खुद को मुख्य सचिव बताते हुए कलेक्टर को फोन किया और डीएमएफ फंड से संबंधित कार्य तत्काल कराने का दबाव बनाया। लेकिन इस तरह के निर्देश देने पर कलेक्टर को फोन करने वाले पर शक हुआ। उन्होंने एक तरफ तो फोन करने वाले शख्स को ये अहसास भी नहीं होने दिया की, उन्हें किसी बात पर संदेह है। वहीं, दूसरी तरफ संदेह के आधार पर जाल बिछाकर आरोपी को गिरफ्तार करवाने में बड़ी भूमिका निभाई। इस तरह कलेक्टर ने अपनी सूझबूझ का उदाहरण देते हुए जिले में होने वाले बड़े फर्जीवाड़े को भी उजागर कर दिया।
आपको बता दें कि, दो दिन पहले कलेक्टर के शासकीय मोबाइल पर एक व्हाट्सऐप संदेश आया। संदेश भेजने वाले ने खुद को 'मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन' बताया और डीएमएफ फंड से जुड़ा काम तुरंत निपटाने के निर्देश दिए। इस तरह संदेश मिलने पर कलेक्टर को शंका हुई, जिसका पर्दाफाश करने के लिए आईएएस गौरव बैनल ने एक तरफ तो आरोपी से संपर्क बनाए रखा और उसके दिए निर्देश को जल्दी निपटाने का आश्वासन दिया, ताकि उन्हें किसी तरह का संदेह न हो। दूसरी तरफ संबंधित संदेश की जांच शुरू कराई और योजनाबद्ध तरीके से आरोपी को पकड़ने की रणनीति बनाई। उन्होंने तुरंत पुलिस अधीक्षक को सूचित किया, जिसके बाद इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
सोमवार को आरोपी सचिन्द्र तिवारी और आईबी के सब इंस्पेक्टर वाल्मीकि प्रसाद मिश्रा कलेक्ट्रोरेट पहुंचे। जैसे ही दोनों कलेक्टर के कक्ष में पहुंचे, पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि, इस तरह के निर्देश देकर कलेक्टर से फर्जीवाड़ा कराने की पूरी साजिश सचिन कुमार मिश्रा ने रची थी। इसपर पुलिस ने अगले दिन मुख्य आरोपी सचिन कुमार मिश्रा को भोपाल से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी सचिन भोपाल का ही रहने वाला है। वो कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएट है।
जांच में ये पता चला कि, आईबी के सब इंस्पेक्टर वाल्मीकि मिश्रा और उनके बेटे सचिन मिश्रा ने मिलकर डीएमएफ फंड से संबंधित टेंडर के काम में हस्तक्षेप करने के लिए फर्जी कॉल करने की साजिश रची थी। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया और उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल पहुंचा दिया है।
डीएमएफ यानी जिला खनिज फाउंडेशन (District Mineral Foundation) एक गैर-लाभकारी ट्रस्ट है जो खनन प्रभावित इलाकों में बनाया जाता है। इसका उद्देश्य खनन से प्रभावित लोगों के विकास और पुनर्वास के लिए कार्य करना है। ये फंड खदान पट्टेदारों से मिलने वाली रॉयल्टी का एक हिस्सा होता है, जिसे जिले में विकास कार्यों के लिए खर्च किया जाता है।
कलेक्टर की शिकायत के बाद मामले की जांच में जुटी वैढ़न पुलिस ने इस मामले में 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें फर्जीवाड़े की साजिश रचने का मास्टरमाइंड 24 वर्षीय सचिन कुमार मिश्रा है। आरोपी मूल रूप से भोपाल का निवासी है। आईबी सब इंस्पेक्टर वाल्मीकि प्रसाद मिश्रा और बैढ़न निवासी सचिन्द्र तिवारी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज पहुंचा दिया है।
इस पूरे प्रकरण में कलेक्टर गौरव बैनल की सतर्कता प्रशासनिक तंत्र के लिए बड़ी मिसाल के रूप में सामने आई है। उन्होंने समय रहते न सिर्फ फर्जीवाड़े को रोका, बल्कि डीएमएफ फंड जैसे संवेदनशील मामले में संभावित भ्रष्टाचार की कोशिश को भी नाकाम किया।
-पुलिस के अनुसार, बीपी मिश्रा और सचिन्द्र तिवारी डीएमएफ फंड से जुड़े कार्य करवाने के इरादे से कलेक्ट्रेट पहुंचे थे।
-थाना वैढ़न में मामला अपराध क्रमांक 1161/2025 के तहत दर्ज किया गया है।
-इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 204, 319 और आईटी एक्ट की धारा 66(D) लगाई गई हैं।
-फिलहाल, पुलिस पूरे फर्जीवाड़े की गहराई से जांच कर रही है।
Published on:
29 Oct 2025 09:58 am
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