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कहीं आप भी तो नहीं हैं FOFO के शिकार ? खुद से पूछें ये सवाल

FOFO Psychology: फोफो यानी ‘सच पता चलने का डर’ एक नया मानसिक डर है जो लोगों को हेल्थ चेकअप, बैंक बैलेंस और कड़वी सच्चाई से भागने पर मजबूर कर रहा है।

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फोफो मनोवैज्ञानिक बीमारी।(सां​केतिक फोटो: AI Generated,डिजाइन:प​त्रिका)

'FOFO Psychology: हम में से अधिकतर लोग FOMO यानि 'फियर ऑफ मिसिंग आउट' की भावना से परिचित होंगे। FOMO का मतलब है (FOFO vs FOMO)-कुछ छूटने का डर (FOFO Psychology)। सरल शब्दों में कहें तो कुछ भी ऐसा जो दूसरों की जिंदगी में है, लेकिन हम उससे वंचित हैं। FOMO (FOFO Syndrome) की तरह ही एक और डर चुपके-चुपके लोगों के मन में जगह बना रहा है। हालांकि, इसका संबंध कुछ छूट जाने से बिल्कुल नहीं है।

अब FOFO बना रहा शिकार (Fear of Finding Out)

यह डर भी चार शब्दों का है और हम में से कई लोगों को अपनी गिरफ्त में ले चुका है। यह है FOFO - 'फियर ऑफ फाइंडिंग आउट'। आसान भाषा में इसे 'कुछ पता चलने' या 'सच' जानने का डर कहा जा सकता है। सच से सबको डर लगता है और सच्चाई से रूबरू न होना आम तौर पर सुविधाजनक है। उदाहरण के लिए, अपनी हेल्थ रिपोर्ट देखने से बचना, बैंक स्टेटमेंट खोलने से कतराना या फिर कोई ऐसा ई मेल जिसमें कुछ बुरा होने की आशंका हो, पढ़ने से डरना। अक्सर असहज करने वाली सच्चाई का सामना करने के बजाय लोग यह चाहते हैं कि उन्हें कुछ पता ही न चले यही FOFO है।

कम्फर्ट ज़ोन की तरह है FOFO

FOFO से पीड़ित व्यक्ति सच्चाई से दूर रहता है। यह एक तरह से उसके लिए कम्फर्ट ज़ोन की तरह है, जिससे वह बाहर निकलना नहीं चाहता। FOFO अंदर ही अंदर व्यक्ति को कमजोर करता रहता है और एक अवस्था ऐसी आती है जब उसके लिए कुछ भी कर पाना मुमकिन नहीं रहता। FOFO - यह शब्द सुनने में भले ही नया लगे, लेकिन यह डर हमारे भीतर हमेशा से मौजूद रहा है। बहुत कम लोग ही ऐसे होते हैं, जिन्हें सच्चाई से कोई ऐतराज नहीं होता। वह सच को स्वीकार करते हैं और उसके अनुरूप कार्य करते हैं।

खुद से पूछें यह सवाल

खुद से कुछ सवाल पूछ कर यह जान सकते हैं कि आप FOFO से पीड़ित हैं या नहीं। जैसे क्या आप अपना हेल्थ चेकअप टालते रहते हैं?, क्या आपको अपना बैंक बैलेंस चेक करते समय डर लगता है? क्या आप अपना वजन जांचने से बचते हैं? क्या आप अपने बारे में लोगों की राय जानने या किसी का फोन उठाने से डरते हैं? अगर इन सवालों के जवाब हां, तो फिर आप भी FOFO के शिकार हैं। हेल्थ चेकअप कोई व्यक्ति तभी टालता है, जब उसे किसी बीमारी का अंदेशा हो। कम बैंक बैलेंस की सच्चाई का सामना न करने के लिए बैलेंस देखने में डर लग सकता है। इसी तरह, मोटा होने की हकीकत स्वीकारने से बचने के लिए लोग वजन नहीं देखते। अपने बारे में लोगों की राय जानने या कोई फोन उठाने में डर की वजह, कुछ बुरा सुनने की आशंका है।

कैसे हुई FOFO की उत्पत्ति ?

FOFO मूल रूप से एक मनोवैज्ञानिक बाधा है, यह किसी व्यक्ति को समस्या की गहराई तक जाने से रोकती है। गंभीर या जरूरी बातचीत से बचना भी इसी का हिस्सा है। FOFO की अवधारणा सबसे पहले मेडिकल क्षेत्र में सामने आई थी। शोधकर्ताओं ने इसे ऐसे लोगों के वर्णन के लिए इस्तेमाल किया, जो डर के चलते चिकित्सा सलाह लेने से घबराते हैं, फिर भले ही कितनी भी तकलीफ में क्यों न हों। एक अमेरिकी सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि पांच में से तीन वयस्क बताए गए मेडिकल टेस्ट करवाने से बचते हैं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि टेस्ट के परिणाम गंभीर या शर्मनाक हो सकते हैं।

कैसे निकलें इस चक्रव्यूह से बाहर ?

एक्स्पर्ट्स का कहना है कि FOFO के चक्रव्यूह से बाहर निकलने के लिए यह जरूरी है कि हम सच्चाई की अहमियत समझें। हमें यह समझना चाहिए कि सच चाहे कितना भी कड़वा या डरावना क्यों न हो, उसका सामना कर के ही हालात बेहतर किए जा सकते हैं। जब तक हम सच्चाई को स्वीकारेंगे नहीं, जिंदगी को सही रास्ते पर नहीं ले जा पाएंगे। उदाहरण के तौर पर यदि आप बीमारी की आशंका में हेल्थ चेकअप नहीं करवाएंगे तो समय पर बीमारी का इलाज भी नहीं मिलेगा और स्थिति बिगड़ती चली जाएगी।