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अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद बोले-दलित होने की वजह से नहीं मिला ध्वजारोहण का बुलावा,परिवार संग रामलला के किए दर्शन

अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद परिवार संग रामलला के दर्शन करने पहुंचे। 40 मिनट तक पूजा-अर्चना की। ध्वजारोहण में निमंत्रण न मिलने पर बड़ा बयान दिया।

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सपा सांसद अवधेश प्रसाद फोटो सोर्स Social Media/X

सपा सांसद अवधेश प्रसाद फोटो सोर्स Social Media/X

अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने परिवार के साथ रामलला के दर्शन किए। करीब 40 मिनट मंदिर में रुककर उन्होंने पूजा-अर्चना की और कहा कि रामलला के दर्शन उन्हें अद्भुत आत्मिक शांति देते हैं। ध्वजारोहण समारोह में निमंत्रण न मिलने पर भी उन्होंने अपनी बात खुलकर रखी।

अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद शनिवार को अपने परिवार के साथ राम मंदिर शाम करीब 7 बजे पहुंचे। सांसद सबसे पहले गर्भगृह में रामलला के दर्शन किए। इसके बाद पहली मंजिल पर बने रामदरबार में भी उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। लगभग 40 मिनट तक मंदिर परिसर में रुकने के दौरान उन्होंने पूरे परिवार के साथ दर्शन-पूजन किया। रामजन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्यों ने पहुंचते ही उनका स्वागत किया।

अयोध्या के विकास में राजनीति नहीं सिर्फ सेवा भाव होना चाहिए

दर्शन के बाद बात करते हुए सांसद ने कहा कि रामलला के दर्शन हर बार एक अनोखी आध्यात्मिक अनुभूति कराते हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम सत्य, मर्यादा और सद्भाव के प्रतीक हैं। और समाज में प्रेम-भाईचारा बनाए रखना ही सच्ची भक्ति है। उन्होंने कहा कि अयोध्या के विकास में राजनीति नहीं, बल्कि सेवा की भावना होनी चाहिए।

ध्वजारोहण में बुलाया जाता तो वह नंगे पैर जाते

ध्वजारोहण कार्यक्रम में बुलावा न मिलने पर सांसद ने कहा कि वह इंतजार करते रहे कि कभी न कभी निमंत्रण मिल जाएगा। लेकिन उन्हें कार्ड नहीं मिला। उन्होंने कहा कि अगर बुलाया जाता तो वे नंगे पैर भी पहुंच जाते। उन्होंने यह भी बताया कि कई लोग कहते हैं कि वह दलित समाज से आते हैं। पासी समुदाय से हैं। इसलिए उन्हें निमंत्रण नहीं दिया गया। हालांकि सांसद ने इस पर किसी तरह की नाराजगी जताने के बजाय सिर्फ अपनी बात रखी।

सांसद बोले रामलाल का दर्शन करने से उन्हें आत्मिक शांति मिलती

सांसद ने बताया कि वे कई बार रामलला के दर्शन कर चुके हैं। और हर बार उन्हें आत्मिक शांति मिलती है। उन्होंने कहा कि 25 नवंबर को आम लोगों को भी दर्शन नहीं करने दिया गया था। जिसके लिए उन्होंने जिलाधिकारी से तीन बार बात की। इससे पहले वे 5 अप्रैल को रामनवमी के दिन भी परिवार के साथ मंदिर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि अयोध्या की जनता ने उन पर भरोसा करके सेवा का मौका दिया है। और वे उस भरोसे पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करेंगे।


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