
UPI से पेमेंट करना आसान तो होता है, लेकिन इससे आप अपने खर्चों को ट्रैक नहीं कर पाते हैं. PC: Canva
Salary Saving Tips: आपकी सैलरी कब आती है और कब खत्म हो जाती है, पता ही नहीं चलता। अगर ऐसा हो रहा है तो आप अकेले नहीं हैं। EMI, घर के खर्चे, स्कूल की फीस में सैलरी यूं निकल जाती है और महीना खत्म होने से पहले ही आप खाली हाथ हो जाते हैं और फिर शुरू होता है अगली सैलरी का इंतजार। इस चक्र से अगर आप बाहर निकलना चाहते हैं तो आपको अपनी आदत में छोटा सा बदलाव करना होगा, जिससे आप इतनी अपनी सैलरी को इस तरह से खर्च करेंगे कि आप कुछ पैसे बचा पाएंगे और सैलरी का इंतजार करने की जरूरत नहीं रहेगी।
कई छोटे-मोटे खर्चों को हम देखते तक नहीं है, लेकिन यही छोटे-खर्चे जब बहुत सारे होते हैं तो एक बड़ा अमाउंट बन जाते हैं. इसलिए सभी छोटे-बड़े खर्चों का हिसाब रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप किसी बजटिंग ऐप का इस्तेमाल करें या एक नोटबुक में सारे खर्चे लिखें। जिससे आप ये साफ-साफ देख सकेंगे कि आपका पैसा खर्च कहां हो रहा है। जैसे आप 50-100 रुपये की छोटी छोटी UPI पेमेंट भी ट्रैक करें, ताकि अगर कोई फिजूलखर्ची हो रही है तो उसे रोकें। महीने के अंत में आप देखेंगे कि आपने थोड़ी बचत तो जरूर कर ली है।
सैलरी आते ही दनादन उड़ाना मत शुरू करें, नहीं तो पहले हफ्ते में ही आपकी जेब खाली हो जाएगी। महीने में 4 हफ्ते होते हैं, खर्चों को चार हिस्सों में बांट दीजिए। इससे होगा ये कि हफ्ते के शुरू में सिर्फ जरूरी खर्चों को छोड़कर जैसे कि राशन या EMI बाकी खर्चे नहीं होंगे और पैसा बाकी हफ्तों के लिए बचा रहेगा।
हम कई बार भावनाओं में बहकर चीजें खरीद लेते हैं। जैसे बच्चों के लिए हम जबरदस्ती चीजें खरीद लेते हैं, जिसकी जरूरत भी नहीं होती है। हम कई बार कोई नया फोन, कोई गैजेट सिर्फ इसलिए खरीद लेते हैं क्योंकि हमने उसे अपने दोस्तों के पास देखा, इससे बचने की जरूरत है। इसका तरीका ये है कि सिर्फ 24 घंटे तक अपनी ऐसी शॉपिंग को होल्ड पर रखें, तो आप खुद देखेंगे कि वो चीज इतनी जरूरी भी नहीं थी। आप फिजूलखर्ची से बच जाएंगे।
अगर आप क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते हैं तो आप BNPL सुविधा को जानते होंगे। ये ऑप्शन बुरा नहीं है लेकिन इसका ज्यादा इस्तेमाल आपको कर्ज के जाल में फंसा सकता है। इस सुविधा का इस्तेमाल तभी करें, जब आप पूरी तरह से आश्वस्त हों कि आप समय पर पैसों का पूरा पेमेंट कर पाएंगे। इसी तरह क्रेडिट कार्ड के मिनिमम अमाउंट ऑप्शन को लेकर भी सतर्क रहें, जहां तक हो सके पूरा पेमेंट करें।
UPI से पेमेंट करना आसान तो होता है लेकिन इससे आप अपने खर्चों को ट्रैक नहीं कर पाते हैं। इसलिए हफ्ते में कुछ हिस्सा कैश में खर्च करें, UPI का इस्तेमाल कम कर सकें तो बेहतर होगा। अगर करते हैं तो उसको भी ट्रैक करें।
अपनी सैलरी को मैनेज करने के लिए इस आसान फॉर्मूले का इस्तेमाल करें:
अगर आप इसे पूरी तरह फॉलो नहीं भी कर पाते तो भी थोड़ी बचत से शुरुआत करना कुछ न करने से बेहतर है।
हमारे बहुत सारे ऐसे खर्चे होते हैं, जिस पर बहुत आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। जैसे हम बार-बार बाहर से खाना ऑर्डर करते हैं या फिर बाहर जाकर खाना खाते हैं, आपको पता नहीं चलता लेकिन बाहर का खाना बहुत महंगा पड़ता है। इसलिए कोशिश करें कि बाहर का खाना कम से कम खाएं, ये आपकी सेहत और आपकी जेब की सेहत दोनों के लिए ही अच्छा है।
अगर आपने बहुत सारे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स की सब्सक्रिप्शन ले रखी है तो आप इसमें कटौती करके काफी पैसे बचा सकते हैं। आप देखें कि आप कौन से OTT प्लेटफॉर्म हैं जिनका सब्सक्रिप्शन आप खत्म कर सकते हैं। आजकल वैसे भी सब्सक्रिप्शन काफी महंगे हो चुके हैं। इन पैसों का इस्तेमाल आप किसी दूसरे खर्चों में कर सकते हैं।
जिस दिन आपकी सैलरी आती है, उसके बाद ही अपने सेविंग्स अकाउंट पर ऑटो ट्रांसफर सेट कर दें। यानी बचत को ऐसे मानें जैसे कोई जरूरी बिल जिसे सबसे पहले जमा करना है, न कि वह पैसा जो महीने के अंत में बचता है।
इमरजेंसी फंड बहुत जरूरी होता है। मुश्किल वक्त में जब आपको पैसों की जरूरत होती है तो यही फंड आपकी मदद करता है। हर महीने सिर्फ 500–1,000 रुपये से शुरुआत करें। समय के साथ यह एक सुरक्षा कवच बन जाता है, जो मेडिकल जरूरतों या किसी भी इमरजेंसी में आने वाले खर्च में आपको कर्ज़ लेने से बचाता है।
Published on:
30 Nov 2025 02:16 pm
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