
पत्रिका ने मोबाइल गेमिंग के दुष्परिणाम पर पीए-श्री केंद्रीय विद्यालय खंडवा में कार्यशाला आयोजित की।
पत्रिका ने शनिवार को पीएम-श्री केंद्रीय विद्यालय खंडवा में मोबाइल के दुष्परिणाम पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान आईएएस सृष्टि देशमुख ने बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्परिणाम बताए।
आईएएस सृष्टि देशमुख ने बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्परिणाम बताए। उन्होंने कहा पढ़ाई के समय मोबाइल में सोशल मीडिया पर वर्क से बचें। रील की बजाय रियल वर्क किताबों पर करें। पढ़ाई पर समय खर्च करें। स्कूल के बाद घर पर रिवाइज्ड करें। सफलता के लिए दिन में ऐसे सपने देखें कि रातों को नींद नहीं आए। लक्ष्य तय करें। उन्होंने अपना अनुभव शेयर करते हुए कहा कि सोशल मीडिया से बचें और रियल में किताबें इतना बढ़ें कि हमारी जगह पर आप खड़े हो जाएं।
आईएएस सृष्टि देशमुख ने बच्चों से पढ़ाई के लिए पूर्व राष्ट्रपति रहे एपीजे अब्दुल कलाम और पढ़ाई पर समय के लिए विराट कोहली जैसे खिलाडिय़ों का उदाहरण दिए। यातायात डीएसपी अनिल सिंह चौहान ने मोबाइल गेमिंग से बचने के लिए कई उदाहरण दिए। महिला टीआई सुलोचना ने बेटियों व बेटों को दोस्ती पर अलर्ट किया। प्राचार्य धनीराम पटेल और उप प्राचार्य हरेन्द्र प्रसाद ने अतिथियों का स्वागत किया।
अपर कलेक्टर सृष्टि देशमुख ने कहा ने बच्चों से कहा कि सोशल मीडिया पूरी तरह कमर्शियल हो गया है। क्योंकि आप जैसे ही इंस्टाग्राम पर लॉगिंग करते हैं। एक के बाद एक ऐड आने लगते हैं। अगर आप अमेजान पर चप्पल सर्च करेंगे तो आप को शॉपिंग के लिए प्रेरित करेगा। क्यों कि आप का डेटा उनके पास सेव है। सोशल मीडिया पर लॉगिंग करते समय पॉजीटिव और निगेटिव दोनों वर्क कर रहा है। सोशल मीडिया पर वर्क आप का समय खराब होगा। इसे हमें इसे समझना होगा।
अनिल सिंह चौहान, डीएसपी, यातायात, ऑनलाइन गेमिंग से बच्चों को बचने के लिए कई उदाहरण दिए। उन्होंने साइबर क्राइम से लेकर गेमिंग तक बच्चों के दुष्परिणाम बताए और बचाव की जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने मोबाइल गेमिंग के आदी बच्चों को मोबाइल नहीं मिलने पर घर में तोड़-फोड करते हैं। उन्होंने पूछा कि घर में मोबाइल कौन-कौन देखता है। अधिकतर बच्चों ने हाथ उठाए। जैसे ही उन्होंने पूछा कि खाना खाते समय मोबाइल कौन देखता है। उन्होंने मोबाइल से दूर करने की सलाह दी।
धनीराम पटेल, प्राचार्य, पीए-श्री केंद्रीय विद्यालय, मोबाइल पर लगातार ऑनलाइन गेमिंग से बच्चों की लत खराब हो रही है। पैरेंट्स की शिकायतें भी हैं। समझाइश दी जाती है। जिससे बच्चे अपने पढ़ाई के साथ ही वास्तविक दुनिया और समाज से कट जाते हैं। बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले लैपटॉप या मोबाइल को सीधे खरीदारी न करने दें। बच्चों को अज्ञात वेबसाइटों से सॉटवेयर और गेम डाउनलोड नहीं करने की सलाह दें।
यशांश, कक्षा-12, मोबाइल का उपयोग स्क्रीन टाइम को कम कैसे करें।
जवाब : स्क्रीन टाइम कम करने के लिए पढ़ाई और शौक को प्राथमिकता दें।
परवेज शेष,कक्षा-12 मोबाइल एडिक्शन को कम कैसे करें।
जवाब : मोबाइल एडिक्शन से बचने के लिए समय-सीमा तय करें और अनुशासन रखें।
लक्की भावसार,कक्षा-12 गेमिंग के दौरान अगर गलत लिंक या फिर साइट पर चले गए तो क्या करना चाहिए।
जवाब : गलत लिंक या साइट पर जाने पर तुरंत बंद करें और सतर्क रहें।
अथर्व कुमार, कक्षा-12, माता-पिता पिता को क्या करना चाहिए।
जवाब : माता-पिता को बच्चों से संवाद करना और भरोसा बनाए रखना चाहिए।
नम्रता चौधरी, कक्षा-12 मोबाइल पर कोर्स आते हैं ।
जवाब : मोबाइल पर आने वाले कोर्स को सोच-समझकर चुनें और नियमितता रखें।
टियाना, कक्षा-12 आपने किस तरह से तैयारी की।
जवाब : आत्मविश्वास और सही रणनीति सबसे अहम है। सोशल मीडिया से दूर रहकर तैयारी में निरंतरता को बनाए रखें।
पियूष ढोके, कक्षा-12 मोबाइल गेमिंग से बचने के लिए क्या करें।
जवाब : मोबाइल गेमिंग से बचने के लिए लक्ष्य तय करें और पढ़ाई पर ध्यान दें।
अनयकक्षा-6, मंच से कलेक्टर ने बच्चों से पूछा कि स्कूल के बाद समय कहां उपयोग करना चाहिए, अनय समेत अन्य बच्चों ने जवाब दिए कोचिंग, खेल-कूद आदि।
लक्ष्मी प्रसाद चौधरी, शिक्षक, कार्यक्रम का संचालन करते समय बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग से बचने के लिए प्रेरित किया। कहा कि सोशल मीडिया पर गेमिंग से बचें। उदाहरण दिए कि मीडिया में खबरें आती हैं कि बच्चों के गेमिंग से परिवार के बैंक तक खाली हो जाते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया से बचने के लिए प्रेरित किया।
जिससे आप और आप के परिवार को हानी नहीं पहुंचे।
यशदेव हाड़ा, शिक्षक, मोबाइल पर ऑनलाइन गेमिंग के दौरान होने वाले दुष्परिणाम को बताया। उन्होंने बच्चों से कहा कि मोबाइल पर डाउन लोड किए गए ऐप आप के डेटा को कैच करते हैं। कई ऐप्स, भले ही वे डेटा कैच करने के लिए डिजाइन किए गए हों, आपकी सहमति के बिना आपके माइक्रोफोन और अन्य डेटा का उपयोग कर सकते हैं, गोपनीयता को खतरा हो सकता।
ये भी दी गई जानकारी
ठग, सोशल मीडिया की प्रोफाइल में आपके परिचितों की तस्वीर लगाकर जानकारी ले सकते हैं।
डराने व धमकाने का तरीका भी अपना सकते हैं, ऐसे में पैरेंट्स को तत्काल जानकारी देना चाहिए।
मोबाइल पर फर्जी कॉल से भी ठगने की कोशिश की जाती है, अनजान नंबर पर विश्वास नहीं करें।
हैप्पी बर्थडे जैसे मैसेज व आमंत्रण से भी ठगी की गई है, एपीके लिखे लिंक को क्लिक नहीं करें।
Published on:
30 Nov 2025 12:54 pm
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