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फूट-फूटकर रो पड़ीं RJD नेत्री उषा देवी, बोलीं– हमसे पैसा नहीं मांगा, पर पैराशूट से आए लोग टिकट ले गए

Bihar Election: इन दिनों बिहार विधानसभा चुनाव के लिए टिकट पाने के लिए राबड़ी देवी के आवास के बाहर नेताओं और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। किसी को टिकट मिल रहा है, किसी को नहीं। जिन्हें टिकट मिल भी रहा है, वे खुशी-खुशी लौट रहे हैं। लेकिन जो खाली हाथ रह गए हैं, उनकी प्रतिक्रिया अलग-अलग है। ऐसे ही राजद नेत्री उषा देवी भी टिकट न मिलने के बाद फूट-फूट कर रो पड़ीं।

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पटना

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Anand Shekhar

Oct 19, 2025

bihar election: राजद नेत्री उषा देवी

राजद नेत्री उषा देवी

Bihar Election: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का माहौल अब न सिर्फ़ गरमा रहा है, बल्कि भावनाओं का तापमान भी दिखा रहा है। टिकट बंटवारे के इस दौर में नेताओं की भीड़ के बीच कई ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं के वीडियो और तस्वीरें सामने आ रही हैं, जो सबका ध्यान खींच रही हैं। रविवार को भी पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास के बाहर ऐसे नज़ारे कई बार देखने को मिले। इसी सिलसिले में राजद की जमीनी कार्यकर्ता और बाराचट्टी विधानसभा सीट से टिकट की दावेदार उषा देवी भी रविवार को राबड़ी आवास पहुंचीं और मीडिया के सामने फूट-फूट कर रो पड़ीं।

लालू जी हमारे पिता समान -उषा देवी

उषा देवी ने कांपती आवाज़ में कहा, “लालू प्रसाद यादव जी हमारे पिता समान हैं। उन्होंने खुद कहा था कि डरना मत, तुमको हम विधानसभा भेजेंगे। हमने दिन-रात मेहनत की, पार्टी का झंडा उठाया, लोगों तक राजद की सोच पहुंचाई। लेकिन आज टिकट की लिस्ट में हमारा नाम नहीं है।” उन्होंने बताया कि उन्होंने पिछले कई वर्षों से पार्टी के लिए काम किया, हर आंदोलन, हर अभियान में भाग लिया, लेकिन टिकट की घोषणा ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया।

पैराशूट से आए लोग टिकट ले गए - उषा देवी

अपने दर्द को छिपा न सकीं उषा देवी बोलीं, “हमसे टिकट के लिए कभी पैसा नहीं मांगा गया, पर ये जरूर हुआ कि जो लोग ऊपर से आए, जिनका ज़मीनी जुड़ाव नहीं है, वो टिकट लेकर उड़ गए। हम जैसे लोग, जो झंडा ढोते हैं, जनता के बीच हैं, उन्हें नज़रअंदाज़ कर दिया गया।” उन्होंने कहा कि पार्टी को ऐसे कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाना चाहिए जो गांव-गांव जाकर लोगों से जुड़ते हैं, ना कि सिर्फ सोशल मीडिया पर दिखने वाले चेहरे।

तेजस्वी भैया बोले थे -टिकट मिलेगा

उषा देवी ने बताया कि कुछ दिन पहले ही उनकी मुलाकात तेजस्वी यादव से हुई थी। उस वक्त उन्होंने भरोसा दिलाया था कि टिकट उन्हें ही मिलेगा। उन्होंने बताया, “तेजस्वी भैया ने कहा था – आप रुको, टिकट मिलेगा। हमने भरोसा किया, लेकिन हमे टिकट नहीं मिला है। अब मैं अपने गांव लौट रही हूं। वहां जाकर भी पार्टी के लिए काम करूंगी, तेजस्वी भैया के लिए प्रचार करूंगी। हमने कभी पार्टी के खिलाफ कुछ नहीं कहा, और न कहेंगे।”

झंडा ढोने वालों को भी आगे बढ़ाइए

अंत में उषा देवी ने अपनी बात एक भावुक अपील के साथ रखी। उन्होंने कहा, “पार्टी हम जैसे कार्यकर्ताओं के दम पर चलती है। हम झंडा ढोते हैं, पोस्टर लगाते हैं, जनता से बात करते हैं। बस इतना कहना चाहती हूं कि झंडा ढोने वालों से सिर्फ झंडा मत ढुलवाइए... उन्हें भी आगे बढ़ाइए।” हालांकि, उषा देवी ने साफ कहा है कि वे पार्टी नहीं छोड़ेंगी। उन्होंने कहा, “हम राजद के सिपाही थे, हैं और रहेंगे। लालू जी और तेजस्वी जी हमारे नेता हैं। बस चाहती हूं कि पार्टी अंदर से मजबूत बने और कार्यकर्ताओं की मेहनत को सम्मान मिले।”