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Sunday Guest Editor: लड़की है, खेलकर क्या करेगी..! बन गई प्रदेश की पहली नेशनल कोच, कई मेडल जीते…

Sunday Guest Editor: भारत की म्यूथाई खेल संस्था यूनाइटेड म्यूथाई एसोसिएशन इंडिया (UMAI) की एग्जीक्यूटिव बोर्ड ने रायपुर की म्यूथाई चैंपियन टिकेश्वरी साहू को आधिकारिक रूप से नेशनल कोच का दर्जा दिया।

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Sunday Guest Editor: लड़की है, खेलकर क्या करेगी..! बन गई प्रदेश की पहली नेशनल कोच, कई मेडल जीते...(photo-patrika)

Sunday Guest Editor: लड़की है, खेलकर क्या करेगी..! बन गई प्रदेश की पहली नेशनल कोच, कई मेडल जीते...(photo-patrika)

Sunday Guest Editor: देश में लड़की होने के कारण शुरू से ही परिवार से यह सुनने मिला कि लड़की को खेल सिखा कर क्या करेंगे। लेकिन किस्मत और मेहनत ने आज उस लड़की को म्यूथाई का नेशनल कोच बना दिया। हाल ही में भारत की म्यूथाई खेल संस्था यूनाइटेड म्यूथाई एसोसिएशन इंडिया (UMAI) की एग्जीक्यूटिव बोर्ड ने रायपुर की म्यूथाई चैंपियन टिकेश्वरी साहू को आधिकारिक रूप से नेशनल कोच का दर्जा दिया। 25 साल की टिकेश्वरी कहती हैं कि मेरी सफलता में सभी का सहयोग मिला है। मेरे मामा देवेंद्र साहू यदि मुझे बचपन में खेल के लिए प्रोत्साहित नहीं करते तो शायद में आज यहां तक नहीं पहुंच पाती।

Sunday Guest Editor: दोनो बहनों को भी खिलाड़ी बनाया

रायपुर के गंगानगर में रहने वाली टिकेश्वरी कहती हैं कि मुझे बचपन से ही मार्शल आर्ट का शौक था और मैं देखकर ही इसे सीखने का प्रयास करती थी। मैंने अपनी दोनों छोटी बहनों को भी खेल से जोड़ा। मैंने कक्षा 6 में खेल के कारण ही गुजराती स्कूल में एडमिशन लिया और यहां स्कूल समिति के अध्यक्ष और कोच अनीस मेमन का सहयोग और मार्गदर्शन मिला तो मेरा खेल आगे बढ़ा।

टिकेश्वरी ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेडल जीते। ताइवान में जब खेलने गई थी तो वहां पर ओएसएम (वन स्टैंडर्ड म्यूथाई) का कोर्स किया और उसके बाद 12 वीं खान ग्रेडिंग और आरजे ट्रेनिंग का भी कोर्स किया। इस तरह के तीन कोर्स करने वाली वो एकमात्र खिलाड़ी हैं और जो 7 कोच बने हैं, उनमें से किसी ने भी यह तीनों कोर्स नहीं किए हैं।

सोच: सफलता तभी मिलती है, जब आप लोगों की परवाह किए बिना ही लक्ष्य पर फोकस करते हैं।

राज्य म्यूथाई संघ के अध्यक्ष लखन कुमार साहू और महासचिव अनीस मेमन ने बताया कि टिकेश्वरी शुरू से ही बहुत मेहनती बच्ची रही है और उसकी मेहनत के कारण ही उसे कोच का दर्जा मिला है। वो अभी बस्तर के गीदम के जावंगा में बने एकलव्य खेल परिसर में कोच के तौर पर 25 बच्चों को प्रशिक्षण दे रही हैं।